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कोरोना संक्रमण के दौर में पानी को लेेकर हम कितने सजग

कोरोना संक्रमण के दौर में पानी को लेेकर हम कितने सजग

कोरोना संक्रमण के दौर में पानी को लेेकर हम कितने सजग

इन दिनों पूरी दुनिया सहित भारत कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है, अचानक आयी इस बडी आपदा के कारण कई तरह की नई-नई परेशानिया सामने आ रही है। भारत जैसे देश में अचानक इस तरह की आपदा की कल्पना नहीं की गई थी। कोरोना के कारण जहां एक तरह बडी मात्रा में आर्थिक चुनौतियां बढ रही है।

वही दूसरी तरफ पानी जैसे प्रकृति प्रदत्त नैसर्गिक संसाधन का उपयोग बढ़ रहा है। जल जन जोडो अभियान के द्वारा किये गये एक अध्ययन के अनुसार प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता मेें डेढ़ गुना से अधिक वृद्धि हुयी है। एक व्यक्ति दिन में न्यूनतम 5 से 7 बार हाथ धो रहा है।

घर को स्वच्छ रखने के लिए पोछा एवं धुलाई का कार्य लगातार किया जा रहा है, जिससे प्रति व्यक्ति पानी की खपत बढ़ रही है। पहले नगरीय क्षेत्र में एक व्यक्ति 70-75 लीटर पानी व्यय कर पाता था अब यह व्यय 125 लीटर तक पहुच गया है। आज विश्व जल दिवस के दिन अभियान के द्वारा यह अध्ययन जल संस्थान एवं जल निगम से उपलब्ध आंकडों के आधार पर किया।

हमारे देश का 70 प्रतिशत पानी खेती में प्रयोग किया जाता है, 15 प्रतिशत उद्योगों में, 12-15 प्रतिशत घरेलू उपयोग मेें आ रहा है। नीति आयोग मानकर चल रहा है कि वर्ष 2030 तक देश के कई शहर डे जीरों में पहुच जायेगे। चेन्नई, मेरठ, शिमला जैसे शहरों में भूमिगत जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, अगर अभी कदम ना उठाये गये तो अगले 10 साल में इनपर पानी की बडी मार पड़ेगी।

अभी जल संकट पूरी तरह से आया नहीं है, इसका बढ़ा कारण यह है कि मौसम के बदलाव, वर्षा, ग्लेशियर इन परिस्थितियों को नियंत्रित किये हुए है और हम पानी की हाय-हाय से काफी हद तक बचे हुए है।

हमें अपनी जीवन शैली उसी के अनूरूप ढालनी पड़ेगी। प्रकृति के नये हमले के रूप में कोरोना जैसी बिमारियां बडी जगह बना रही है जिनका तत्काल कोई उपाय नहीं दिखता है। सवाल यह है कि पानी को लेकर हम कितने सजग है राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जिम्मेदारी को समझते प्रयास करने की आवश्यकता है।

यदि यह कोरोना का संकट और बढ़ा तो आने वाले समय में जल की खपत और अधिक बढेगी, जिसका प्रभाव आने वाले समय मेें दिखायी देगा। अभियान के राष्ट्रीय संयोजक डाॅ. संजय सिंह का कहना है कि लोग विवेकपूर्ण ढंग से पानी का उपयोग करे, कोरोना जैसी महामारी से लडे एवं प्रकृति द्वारा प्रदत्त जल जैसे संसाधन को व्यक्तिगत स्तर पर बचाने का कार्य जरूर करे।

-डाॅक्टर संजय सिंह, परमार्थ सचिव

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