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बुन्देलखण्ड में गहराने लगा जल का संकट

बुन्देलखण्ड में गहराने लगा जल का संकट

बुन्देलखण्ड में गहराने लगा जल का संकट

अप्रैल का महीना आते ही बुन्देलखण्ड के कई इलाकों में जल संकट गहराने लगा है। शेलो हैण्डपम्पों ने पानी देना बंद कर दिया है, इण्डिया हैण्ड मार्कअप हैण्डपम्पों मेें भी पानी बहुत देर में आ रहा है। पानी का डिस्चार्ज कम हो गया है। हैण्डपम्पों पर लाइन फिर से लगने लगी है। जो कोरोना जैसी घातक महामारियों के सोशल डिस्टेंसिग के सिद्धांत को प्रभावित कर रही है। जालौन के कालपी में पानी के संकट के कारण लम्बी-लम्बी लाइनें देखी गई, इसी तरह झांसी नगर एवं बबीना, बंगरा, गुरसराय के गांव में पानी का संकट गहराने लगा है जैसे-जैसे गर्मी बढेगी और गांव के तालाब सूखेगे, वैसे ही बुन्देलखण्ड के गांव मेें पानी का संकट गहराने लगेगा। जालौन गांव अमखेडा की विटोली देवी कहती है कि वह अपने घर के अन्दर लगेे घरेलू हैण्डपम्प से आसानी से पानी निकाल लेती थी अब उनका हैण्डपम्प सूख गया है एवं एक बूंद पानी नही निकलता है। वही झांसी के रानीपुर के नत्थू सिंह तोमर कहते है कि हैण्डपम्प मेें बाल्टी पहले दो मिनट मेें भर जाती थी अब उसको भरने मेें 5-6 मिनट लग रहे है। बबीना के मानपुर में सौभाराम अहिरवार का कहना है कि हैण्डपम्पों को जल स्तर नीचे चला गया है और उनमें पाइप बढाने पड रहे है।
जल जन जोडो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह का कहना है कि बुन्देलखण्ड मेें मेंथा जैसी फसलें लोग पैदा कर रहे है जिनमें पानी की अत्यधिक आवश्यकता होती है। लगातार सिंचाई से बुन्देलखण्ड के जालौन एवं झांसी की मोंठ तहसील मेें जल स्तर नीचे जा रहा है। मेंथा में हो रही सिंचाई के कारण जल स्तर और अधिक नीचे जायेगा। जिसके कारण पेयजल का संकट और अधिक बढेगा। जिसका प्रभाव बुन्देलखण्ड की जनता पर दिखायी देगा। बुन्देलखण्ड के लोगों को मेेंथा जैसी खेती से परहेज करना चाहिए, इस इलाके में कम पानी की फसलो को बढावा देने की आवश्यकता है।

 

- डाॅक्टर संजय सिंह, परमार्थ सचिव

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